Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi) https://www.thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal Anusandhan: A Multidisciplinary International Journal (Hindi) en-US info@adrpublications.in (ADR Publications) Mon, 02 Mar 2026 07:39:43 +0000 OJS 3.2.0.4 http://blogs.law.harvard.edu/tech/rss 60 डिजिटल युग में हिंदी साहित्यिक पुस्तकों की उपेक्षा और युवा पाठकों की प्राथमिकताएँ: पूर्वी दिल्ली का क्षेत्रीय विश्लेषण https://www.thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/1968 <p>हिंदी साहित्य भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों का आधार रहा है। यह केवल भाषा की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों, संवेदनाओं और विचारों की गहराई का प्रतीक है। किंतु तकनीकी युग के इस दौर में, जब जीवन का प्रत्येक क्षेत्र डिजिटल माध्यमों से जुड़ चुका है, तब साहित्यिक पुस्तकों के प्रति युवाओं की रुचि में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा गया है। मुद्रित पुस्तकों की जगह अब ई-पुस्तकों, श्रव्य पुस्तकों और इंटरनेट आधारित सामग्री ने ले ली है, जिससे पारंपरिक पठन संस्कृति प्रभावित हुई है।</p> <p>यह अध्ययन पूर्वी दिल्ली क्षेत्र के 14 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं पर किया गया, जिसमें कुल 95 उत्तरदाताओं से प्राप्त विचारों के आधार पर विश्लेषण किया गया। परिणामों से स्पष्ट हुआ कि युवाओं में साहित्यिक पुस्तकों के प्रति जिज्ञासा बनी हुई है, परंतु नियमित पठन की आदत में कमी आई है। बयालिस प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे कभी-कभी साहित्यिक पुस्तकें पढ़ते हैं, जबकि इक्कीस प्रतिशत युवाओं ने स्वीकार किया कि वे अब पुस्तकें नहीं पढ़ते। ई-पुस्तकों का आकर्षण उनकी सरल उपलब्धता, कम लागत और आधुनिकता के कारण बढ़ा है, किंतु इस सहजता ने साहित्यिक गहराई और एकाग्रता में कमी उत्पन्न की है।</p> <p>अध्ययन यह भी दर्शाता है कि यदि साहित्यिक पुस्तकों को आधुनिक तकनीकी माध्यमों में प्रस्तुत किया जाए, जैसे श्रव्य पुस्तकों, साहित्यिक अनुप्रयोगों और सामाजिक मंचों के माध्यम से, तो हिंदी साहित्य को पुनः युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाया जा सकता है। डिजिटल युग हिंदी साहित्य के लिए चुनौती के साथ-साथ एक नया अवसर भी प्रस्तुत करता है, जिससे उसकी परंपरा आधुनिक रूप में जीवित रह सकती है।</p> Aparna Dias Copyright (c) 2026 Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi) https://www.thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/1968 Mon, 02 Mar 2026 00:00:00 +0000 मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक क़ानून के प्रति जागरूकता एवं धारणा: राजस्थान आधारित अध्ययन https://www.thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/1974 <p>भारत में व्यक्तिगत कानूनों और लैंगिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर पिछले कुछ वर्षों में व्यापक बहस उभरी है, जिनमें तीन तलाक का प्रश्न सबसे अधिक चर्चित रहा। कानूनी सुधारों के बावजूद समुदाय की जागरूकता और धारणा को समझना अभी भी सामाजिक अध्ययन का महत्वपूर्ण पहलू है। यह अध्ययन राजस्थान के मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक क़ानून के प्रति जागरूकता के स्तर और उससे जुड़ी सामाजिक धारणाओं का विश्लेषण करता है। वर्ष 2019 में पारित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम ने तीन तलाक की प्रथा को दंडनीय अपराध घोषित करते हुए मुस्लिम महिलाओं के वैवाहिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का उद्देश्य निर्धारित किया। यद्यपि यह कानूनी परिवर्तन महत्त्वपूर्ण है, इसकी वास्तविक समझ और स्वीकार्यता सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि, शिक्षा स्तर और धार्मिक दृष्टिकोण के अनुसार भिन्न हो सकती है। इसी संदर्भ में इस शोध में राजस्थान के तीन प्रमुख जिलों—जोधपुर, जयपुर और सीकर—को अध्ययन क्षेत्र के रूप में चयनित किया गया।</p> <p>अध्ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धतियों का प्रयोग किया गया। शोध हेतु प्राथमिक आँकड़े एक सुव्यवस्थित प्रश्नावली के माध्यम से संकलित किए गए। कुल 282 उत्तरदाताओं से जानकारी प्राप्त की गई, जिनमें जोधपुर से 68, जयपुर से 114 तथा सीकर से 100 प्रतिभागी शामिल थे। इन उत्तरदाताओं में पुरुषों और महिलाओं दोनों की सहभागिता सुनिश्चित की गई, ताकि समुदाय के विविध दृष्टिकोणों को संपूर्णता से समझा जा सके। चूँकि अध्ययन मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक क़ानून के प्रति जागरूकता एवं धारणा पर केंद्रित था, इसलिए उत्तरदाताओं का चयन राजस्थान के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से किया गया। प्रश्नावली में सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक तथा विधिक पहलुओं से संबंधित प्रश्न शामिल किए गए थे, जिससे यह जाना जा सके कि तीन तलाक क़ानून के प्रति लोगों की वास्तविक जानकारी, अनुभव, दृष्टिकोण और व्यवहारिक समझ किस प्रकार निर्मित होती है।</p> Raisa Bano Copyright (c) 2026 Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi) https://www.thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/1974 Fri, 27 Feb 2026 00:00:00 +0000