मुग़लकालीन चित्रण में नारी की भूमिका
Keywords:
मुग़ल चित्रकला में नारी अंकन, मुग़ल चित्रों में नारी संयोजन, मुग़ल चित्रों में वस्त्राभूषण, मुग़लकालीन प्रमुख स्त्री चित्रAbstract
भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में चित्रकला का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, जिसके अंतर्गत सदैव ही नारी के विभिन्न रूपों का चित्रण किया जाता रहा है। मुगल चित्रकला में भी नारी चित्रण हुआ है, परंतु अपेक्षाकृत कम। मुग़ल कलाकारों ने स्त्री आकृतियों को समुचित ढंग से संयोजित कर विभिन्न वस्त्राभूषणों से अलंकृत करके एक आदर्श रूप में प्रस्तुत किया, जिसका उदाहरण अनेकों मुग़ल चित्रों में देखा जा सकता है।
How to cite this article:
अनीता राठी, शालिनी, मुग़लकालीन चित्रण में नारी की भूमिका, Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(3&4): 26-31
DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202621
References
ब्राउन, पर्सी, ‘‘इण्डियन पेंटिंग अण्डर द मुगल्स’’, आॅक्सफोर्ड, 1924 नई दिल्ली, पृ॰सं॰ 157
सर रिचर्ड वैसली, ‘‘इण्डियन आर्ट’’, पृ॰सं॰ 130
दास, अशोक कुमार, ‘‘मुगल पेंटिंग ड्यूरिंग जहाँगीर टाइम’’, कोलकाता, 1978, पृ॰सं॰ 2
प्रताप, रीता, ‘‘भारतीय चित्रकला और मूर्तिकला का इतिहास’’, हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर (राजस्थान), पृ॰सं॰ 147
प्रताप, रीता, ‘‘भारतीय चित्रकला और मूर्तिकला का इतिहास’’, हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर (राजस्थान), पृ॰सं॰ 147
वर्मा, अविनाश बहादुर, ‘‘भारतीय चित्रकला का इतिहास’’, बरेली, 1999, पृ॰सं॰ 150
जे॰बी॰एस॰, विल्सन, ‘‘मुगल पेंटिंग फैबर एण्ड फैबर’’
मोतीचन्द्र, ‘‘टेक्नीक आॅफ मुग़ल पेंटिंग, पृ॰सं॰ 63
डपेीतंए त्माींए ष्ॅवउमद पद डनहींस प्दकपंष्ए चण् 119
वर्मा, अविनाश बहादुर, ‘‘भारतीय चित्रकला का इतिहास’’, बरेली, 1999, पृ॰सं॰ 166
शेरवानी, एच॰के॰, ‘‘कल्चरल सिन्थेसिस, इन मिडिवल इण्डिया आॅफ इण्डियन हिस्ट्री’’ खण्ड-22, भाग-1, पृ॰सं॰ 100
मीरा की शब्दावली, सूरसागर (13-64), लाल लहंगा (606), पृ॰सं॰ 780
तुजुके जहाँगीरी
वर्मा, अविनाश बहादुर, ‘‘भारतीय चित्रकला का इतिहास’’, बरेली, 1999, पृ॰सं॰ 166
मनुची, ‘‘स्टोरिया द मोगेर’, अनुवाद-इरविन, पृ॰सं॰ 328-331