महिला लेखन और हिंदी साहित्य: एक नारीवादी दृष्टिकोण

Authors

  • Geetha Devi Dr B Lecturer in Hindi Government Degree College, Avanigadda, Andhra Pradesh, India

Abstract

यह शोध आलेख हिंदी साहित्य में महिला लेखन की प्रवृत्तियों और नारीवादी दृष्टिकोण के प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि स्त्री लेखन किस प्रकार सामाजिक असमानताओं, पितृसत्ता, यौनिकता, जाति और वर्ग आधारित शोषण का प्रतिरोध करता है और स्त्री अस्मिता को एक वैचारिक स्वर देता है। शोध में महादेवी वर्मा, कृष्णा सोबती, मन्नू भंडारी, अम्रपाली, बामा, उर्मिला पवार और मीना कंदासामी की रचनाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।

अध्ययन की पद्धति गुणात्मक और तुलनात्मक विश्लेषणात्मक रही, जिसमें लेखिकाओं की प्रमुख कृतियों, आत्मकथाओं और उपन्यासों के माध्यम से विषयवस्तु, भाषा और दृष्टिकोण की जांच की गई। परिणामस्वरूप यह सामने आया कि महिला लेखन केवल आत्मकथ्य नहीं, बल्कि प्रतिरोध और परिवर्तन का साहित्यिक औजार भी है।

निष्कर्षतः, यह शोध रेखांकित करता है कि हिंदी महिला लेखन ने नारीवादी विमर्श को एक नई वैचारिक दिशा प्रदान की है, जो साहित्यिक संवेदना के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का भी माध्यम बन चुका है।

How to cite this article:

Geetha Devi, Lecturer in Hindi Government Degree College, Avanigadda, Andhra Pradesh, India, Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(1&2): 37-48.

DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202604

 

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Published

2026-04-08

How to Cite

Dr B, G. D. (2026). महिला लेखन और हिंदी साहित्य: एक नारीवादी दृष्टिकोण. Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi), 11(1&2), 37-48. Retrieved from https://www.thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/1778